यूट्यूब चैनल टॉक विद सिंघल में कोरोना संक्रमण पर स्वरचित कविता राष्ट्र चिंतन
कविता के माध्यम से जनमानस को कोरोना संक्रमण से बचाव व संयम बरतते हुए पुलिस,डॉक्टर और प्रशासन की मदद करने के साथ ही घर पर रहने की अपील भी की है सोशल मीडिया पर यह कविता खूब पसंद की जा रही है
राष्ट्र चिंतन
कर्तव्य पथ कि ये डगर है बड़ी कठिन मगर,
हे वीर तुम झुकना नहीं रणधीर तुम डरना नहीं
वीरों ने इस धरा के लिए,हँस हँस के अगणित कष्ट सहे
खायी है घांस की रोटी,मगर न घुटने अपने टेक दिए
नरसंहार हुआ पड़ा है आज तुम्हारी बारी है,
संक्रमित हो गए हजारों सामने कोरोना महामारी है
कैसा विचित्र संयोग है ये हाथ मिलाने से फैलता यह रोग है,
सर्दी सिरदर्द खांसी और बुखार कोरोना के लक्षण है चार
बचना हो इससे अगर तो पहनो मास्क रहो दूर और धोना हाथ बार-बार
अब भी वक्त है ठहर जाओ संभल जाओ रुको सोचो
ना फेंको पत्थर वीर जवानों पर ना थूको जीवन रखवालों पर
ना रूक सके अब भी तुम तो यह चित्र बड़ा विचित्र होगा,
महामारी से मरने वालों की सूची में हम नाम तुम्हारा भी दर्ज होगा
इस बार लड़ाई गहरी है कोरोना एक अबूझ पहेली है
मतलब परस्त इंसानों से रहना तुम सावधान सभी
धर्म जाति के नाम पर ठँगना बस इनका काम यही
है ना शुकरे गद्दार वो जो देश के काम आते नहीं
सच्चे सिपाही हैं वही जो रण में पीठ दिखाते नहीं
ले लो शपथ तिरंगे की तुम और चुका दो कर्ज इसका,
मरकर नहीं जीवित ही तुम केवल घर पर रुक कर इसका
बचाव ही सुरक्षा है यह मूल मंत्र अपनाना है,
घर पर ही रुकना है हमको और कोरोना को हराना है
कोरोना को हराना है
कोरोना को हराना है
जय हिंद
जय माँ भारती
मनीष कुमार सिंघल
पुत्र-स्व.श्री रामकृष्ण अग्रवाल
छतरपुर/भोपाल (म.प्र.)
https://youtu.be/GjrKVSGpDfU
राष्ट्र चिंतन
कर्तव्य पथ कि ये डगर है बड़ी कठिन मगर,
हे वीर तुम झुकना नहीं रणधीर तुम डरना नहीं
वीरों ने इस धरा के लिए,हँस हँस के अगणित कष्ट सहे
खायी है घांस की रोटी,मगर न घुटने अपने टेक दिए
नरसंहार हुआ पड़ा है आज तुम्हारी बारी है,
संक्रमित हो गए हजारों सामने कोरोना महामारी है
कैसा विचित्र संयोग है ये हाथ मिलाने से फैलता यह रोग है,
सर्दी सिरदर्द खांसी और बुखार कोरोना के लक्षण है चार
बचना हो इससे अगर तो पहनो मास्क रहो दूर और धोना हाथ बार-बार
अब भी वक्त है ठहर जाओ संभल जाओ रुको सोचो
ना फेंको पत्थर वीर जवानों पर ना थूको जीवन रखवालों पर
ना रूक सके अब भी तुम तो यह चित्र बड़ा विचित्र होगा,
महामारी से मरने वालों की सूची में हम नाम तुम्हारा भी दर्ज होगा
इस बार लड़ाई गहरी है कोरोना एक अबूझ पहेली है
मतलब परस्त इंसानों से रहना तुम सावधान सभी
धर्म जाति के नाम पर ठँगना बस इनका काम यही
है ना शुकरे गद्दार वो जो देश के काम आते नहीं
सच्चे सिपाही हैं वही जो रण में पीठ दिखाते नहीं
ले लो शपथ तिरंगे की तुम और चुका दो कर्ज इसका,
मरकर नहीं जीवित ही तुम केवल घर पर रुक कर इसका
बचाव ही सुरक्षा है यह मूल मंत्र अपनाना है,
घर पर ही रुकना है हमको और कोरोना को हराना है
कोरोना को हराना है
कोरोना को हराना है
जय हिंद
जय माँ भारती
मनीष कुमार सिंघल
पुत्र-स्व.श्री रामकृष्ण अग्रवाल
छतरपुर/भोपाल (म.प्र.)
https://youtu.be/GjrKVSGpDfU
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